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    तृष्णा
    by Er Bhargav Joshi બેનામ
    • (19)
    • 186

    मेरे हर वजूद को उसने बेरहमी से तोड़ा है,ताउम्र जिसको मैंने बड़े ही प्यार से जोड़ा है।******* ****** ******* ******** *******इश्क हो रहा है उनसे  क्या किया जाए ???रोकें ...

    कलम नहीं तलवार चुनूँ मैं - मेरी चार कविता
    by Bhupendra Dongriyal
    • 76

            (1)"तुम मेरे प्यारे हो" ????? सच कहूँ तो न हम तुम्हारे हैं, न तुम हमारे हो । सब कहते जरूरत को देखकर, दुनिया में तुम ...

    ग़ज़ल, शेर
    by Kota Rajdeep
    • 64

    न था इंतज़ार कीसुका फ़िर भी उम्र भर इंतज़ार में रहें

    फिर सुनना मुझे
    by Dr Narendra Shukl
    • 152

    अमन बिक रहे हैं अमन बिक रहे हैं , चमन बिक रहे हैं । लाशों से लेकर कपन बिक रहे हैं ।। म्ंत्रियों को देखा है खुले आम बिकते ...

    मे और मेरे अह्सास - 3
    by Darshita Babubhai Shah Verified icon
    • 175

    मे और मेरे अह्सास (3) अकेले है फिर भी व्यस्त्त रहते हैं lअपने आप मे ही मस्त रहते हैं ll ***** दिल्लगी कर ने आया है वो lजिंदगी मेरी ...

    धुँधली तस्वीरें
    by Vinay Tiwari
    • 138

    1)ऐसा ज़रूरी नहीं, राह का हर व्यक्ति हँस कर मिलें, कोई गले मिलकर, थोड़ा सा रो दें, और कुछ न कहें। यहाँ पर वो ख़ुशियाँ हर वक़्त क़िस्मत में ...

    ख़ामोश प्यार।
    by Nimisha
    • (12)
    • 229

    लो समय आ गया बिछड़ने काकर न सके हम कुछ अपनी बात।गई शाम आ गया प्रभात फैली अरूणिम आभा चहुं ओर।    स्वर्णमय हो गया संसारऐसे सुंंदर  अवसर परलो समय ...

    ओस की बूंदें - मुक्तक संग्रह
    by Amrita shukla
    • 101

    फूल खिला है उस महक से जान लेते हैं।कदमों की आहट से कहाँ अन्जान रहते हैं।जबसे तेरा अक्स दिल में उतर आया है ,आंखें बंद हो तो भी तुम्हें ...

    उस बुजुर्ग की दीवाली
    by Tarkeshwer Kumar
    • 210

    जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई हैं मृत्यु, पर उससे भी कटु सत्य हैं वृद्धावस्था। एक कविता के माध्यम से मैंने बुज़ुर्गों के प्रति अपने कर्तव्यों को और इस अवस्था ...

    में और मेरे अहसास - 2
    by Darshita Babubhai Shah Verified icon
    • 144

    में और मेरे अहसास भाग २ खुद को खुद की कबर मे देखता हूं lफिर मे तेरी नजर में देखता हूं ll *** एक लम्हा तो गुजरता नहीं lलोग ...

    ख़ामोश लफ्ज़
    by Er Bhargav Joshi બેનામ
    • (44)
    • 362

    हादसों से ही हमारी पहचान बनती है,बिना दर्द के छवि कहां आसान बनती है।******* ****** ******* ****** *******उछलता है कोई घाव मुझ में लहर बनकर,पता तो करो किसने दिया ...

    बेबस आंखें
    by Dr Narendra Shukl
    • 116

      बेबस आंखें सब कुछ , देखती हैं आंखें - प्रियतम का इंतज़ार करती प्रेमिका को मीनार शिखर पर बांग देते हये पवित्र मौलवी को भीख मांगते , मासूम ...

    संकलन
    by Nikita
    • 74

    वो चर-चर में है, है वो अचर में भीवो कण-कण में है, है वो गगन में भीवो विधाता है संपूर्ण संसार का,है वो मनुष्य मन में भी??? ।। धन्यवाद ।।परमेश्वर ...

    में और मेरे अहसास
    by Darshita Babubhai Shah Verified icon
    • (14)
    • 329

    में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता ...

    मेरी अधूरी प्रेमकहानी
    by Archana Yaduvanshi
    • 157

    आँखों से निकलते हैं आँसूजब याद आती है तेरी हर बाततू भूल गया होगा शायदमुझे नहीं भूलती वो रात।वो जिद तेरी कि गर्लफ्रेण्ड बन जाओवो इनकार मेरा कि नहीं ...

    महाकाल मेरा
    by Shrimali Meet
    • 241

    अब तो तु ही है मनझील मेरीऔर तु ही तो है सहारा मेरा....तेरे सीवा अपनाना कोइ था,ना कोइ है,और अब तो ना ही कोइ रहेगा मेरा....मेरी हर एक मुसीबत ...

    बेनाम लफ्ज़
    by Er Bhargav Joshi બેનામ
    • (41)
    • 474

    नमस्कार दोस्तो,ये मेरी कुछ शायरी और नज़्म है। आप इसे एकबार पढ़े और आपका मंतव्य मुझे जरूर दे ताकि मै और अच्छी नज़्म लिखने का प्रयास करता रहूं ।  ...

    असरार..
    by Karishma Varlani
    • 302

    1). आरज़ू ...हूँ मदहोश सरहोश आज बेहोंश हूँ कहीं हूँ खामोश पर मन्द ही मन्द कुछ कहती हूँ अभीसोचती हूँ लौट आऊँ ,लौट आऊँ तेरे करीब वहींवहीं जहां तू रहता ...

    क्या स्त्री होना गुनाह हैं
    by Seema Kapoor
    • 637

     मेरी एक छोटी सी कविता स्त्रियों पर आधारित है ईश्वर ने उन्हें बनाया है जिस प्रकार से वह केवल उसी प्रकार से रहना ही पसंद करती हैं परंतु समाज ...

    माँ मैं तेरा कर्ज़दार हूँ
    by Tarkeshwer Kumar
    • 465

    माँ, ये जो शब्द हैं ये अपने आप में ही पूरा संसार हैं,मानो इस शब्द के उच्चारण मात्र से मन्न, जीभा, आत्मा, पवित्र हो जाते हैं, कभी आंखें मूंद ...

    शेरो-शायरी
    by Rajashree Nemade
    • 127

    माँ के लिए   १.वक्त ने भी क्या हसी सितम कर दिया, दुसरो के सामने हमे नजरे झुकाना सिखा दिया, पहले  तो हम कभी ऐसे ना थे, लेकीन इस समय ...

    मेरी शेरों-शायरी
    by Rajesh Kumar
    • 158

                  1.तुम्हें देखे कोई और,मेरे दिल में,जलना वाजिब है।कैसे बताऊं तुम्हें मेरे दिल पर,तेरा राज काबिज़ है।              ...

    अतरंगी ज़िन्दगी...
    by Karishma Varlani
    • 479

    1). राहें......है चाह राहगीर को राह खत्म हो जाने कीहै चाह राहगीर को मन्ज़िल पाने कीराह में थका वो राहगीर देखता है बस एक बूंद उस पानी को ,जिससे ...

    कवितायें
    by Ved Prakash Tyagi Verified icon
    • 234

    मेरा गाँव कहीं खो गया   सुंदर ताल, तलैया, बाग,सरोवर, बीच बसा था गाँव मनोहर। हर जाति के लोग बसे थे, बंटे हुए थे सबके काम। सब दिन भर ...

    बेटियों के दरिंदे
    by Tarkeshwer Kumar
    • (16)
    • 808

    एक कविता बेटियों के नाम करना चाहूंगा,आजकल की जो घटनाएं हो रहीं हैं हमें उसके खिलाफ आवाज उठाना ही होगा,हमें बेटियों की रक्षा इन्न दरिंदो से करनी ही होगी ...

    मेरी कविताएं
    by Rajesh Kumar
    • 155

    1.लिखता हूँ, डरता हूँ, डर डर कर लिखता हूँ।लिखने से पहले, हर बात समझता हूँ।इस अमोघ शस्त्र लेखनी से, हर बात सही तो लिखता हूँ।फिर मैं क्यों डरता हूँ?लिखता ...

    जीवन पर 8 कविताएँ
    by Alok Sharma
    • 250

    दुनिया इतनी सरल नही दुनिया इतनी सरल नही जो नज़र आये अक्सर नए राही को दूर के ही डोल सुहाए बड़ो की बातों का अब वो सम्मान रहा कहाँउल्टी ज़ुबाँ कैंची जैसी, ...

    शायरी - 4
    by pradeep Tripathi
    • 226

    कोई इश्क की खातिर मेरे दिल को झिझोड़ रखा हैदिल से पूंछा तो पता चला वो रिश्ता हीं हमसे तोड़ रखा हैतुम कहो तो ज़िन्दगी को गला देता हूंउससे ...

    कभी सोचा न था - १
    by महेश रौतेला
    • 198

    कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,क्षीण आवाज में,सुब-शाम साउगता-अस्त होता,मन से ...

    कचहरी - शांति की पुकार
    by Ajay Amitabh Suman Verified icon
    • 202

    (1)शांति की पुकारये कविता गौतम बुद्ध द्वारा अपने शिष्य महाकाश्यप को बुद्धत्व की प्राप्ति की घटना पर आधारित है। ये घटना अपने आपमें इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि गौतम बुद्ध ...