Hindi Poems Books and stories free PDF

    रात और दिन की संधि
    by Seema Saxena Verified icon
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    If there are images in this attachment, they will not be displayed.   Download the original attachmentसीमा असीम की कवितायें ०९५५७९२९३६५   संग्रह की कवितायेँ अँधेरी रात में सोचती हूँअँधियाराहाँ ...

    क्षणभर
    by महेश रौतेला
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    १.बेटी से संवादतुम्हारा हँसना, तुम्हारा खिलखिलाना,तुम्हारा चलना,तुम्हारा मुड़ना , तुम्हारा नाचना ,बहुत दूर तक गुदगुदायेगा।मीठी-मीठी बातें ,समुद्र की तरह उछलना,आकाश को पकड़ना ,हवा की तरह चंचल होना,बहुत दूर तक ...

    कविताएं
    by Shailendra Chauhan
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    - शैलेन्द्र चौहान दया : दलित संदर्भ में   सोचता रहा हूँ सारी रात औरों के द्वारा की गई दया के बारे में किस किस पिजन होल में रखी ...

    मेरी तूटी फूटी ग़ज़लें..!
    by Parmar Bhavesh આર્યમ્ Verified icon
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    1. प्यार कब था..!आप के लिए प्यारके अलावा ही! सब था !हमारे लिए प्यारके अलावा कुछ कब था ?खुदा भी तुम और भगवान भी तुम ही थे !तुमको ही ...

    इक उधार सी ज़िन्दगी...
    by Haider Ali Khan
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    #इक उधार सी ज़िन्दगी... तुझको खो कर बचा ही किया था, ज़िन्दगी में..! खोने के लिए..बस इक उधार सी ज़िन्दगी जी रहा था..तेरी यादों का कर्ज़ लिए..माफ़ करना तेरी ...

    बेटियाँ - शर्म नहीं सम्मान है.....
    by Satender_tiwari_brokenwords
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    1. वो दौर-----------न जाने वो कैसा दौर रहा होगा जब बेटियों के पैदा होने पर घर गाँव मे सन्नाटा छा जाता थाकहीं मातम भारी शाम होती थीकहीँ पर बेटियों को दफना ...

    हे मधुकर...
    by pradeep Tripathi
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    1. हे मधुकर हे मधुकर थारो चरण पकड़ी के झुलहुँ।या चरनन के भगति बहुत हैं जो वा चरनन को छूलौ।।हे मधुकर थारो चरन पकड़ी के झुलहुँ...हे मधुकर थारो रंग म्हारे ...

    ज्ञान और मोह
    by Ajay Amitabh Suman
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    (1)    ज्ञान और मोह   दो राही चुप चाप चल रहे,ना नर  दोनों एक  समान,एक मोह था लोभ पिपासु ,औ ज्ञान को निज पे मान। कल्प गंग के तट पे दोनों,राही धीरे चले ...

    दिल मेरा
    by अmit Singh
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                          देखा तुमको जब प्रथम बार,                      चांदनी में चमकता रूप ...

    चलोगे क्या फरीदाबाद?
    by Ajay Amitabh Suman
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    (१)   चलोगे क्या फरीदाबाद?   रिक्शेवाले से लाला पूछा, चलोगे क्या फरीदाबाद ?उसने कहा झट से उठकर, हाँ तैयार हूँ भाई साब. हाँ तैयार हूँ भाई साब कि,लाए क्या अपने साथ हैं?तोंद उठाकर लाला बोला,हम  तो  खाली हाथ हैं . हम  तो खाली हाथ हैं कि,साथ मेरे घरवाली है .और

    ऐ जिंदगी...........
    by pradeep Tripathi
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    1.ऐ जिंदगी आ तुझे कुछ इस तरह से, आजमाया जाए।।मैं   जिन्दा भी रहूँ और, मर कर के    दिखाया जाए।।वो  मुझसे   नाराज है, मालूम है मुझको।चल  उसकी नाराजगी को, ...

    मेरी चार कविताए
    by Dr Narendra Shukl
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        घोटालेवाला सर्दी की एक सुबह जब मैं धूप में बैठा ‘क्लासीफाइड‘  में नौकरी तलाश कर रहा था - अचानक , गली से आती हुई , एक आवाज़ ...

    दरिया - एक ग़ज़ल संग्रह
    by Ramanuj Dariya
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    नाम - राम अनुज तिवारी , s/o- श्याम सगुन तिवारी, ग्राम- दरियापुर माफी,पोस्ट - देवरिया अलावल, जिला- गोण्डा,अवध उत्तर प्रदेश. "दरिया" यह एक ग़ज़ल संग्रह है.

    शब्दों की कहानी
    by Satender_tiwari_brokenwords
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    1.जय जवान तू वीर है, तू चट्टान है, तू मेरा अभिमान हैतू ही पहचान मेरी है, तू मेरा स्वाभिमान है।।कुछ लिखकर गर अदा कर सकूँ तेरा कर्ज़मेरा सुकूने ज़िन्दगी पर ...

    एक दिन...
    by Sarvesh Saxena Verified icon
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    एक दिन मैं उदास कहीं जा रहा था,उदासी में ही कोई उदास गीत गा रहा था,थक कर एक पेड़ की छांव में बैठ गया, सोचने लगा कि ये क्या हो ...

    दिलकी बाते - २
    by Vrishali Gotkhindikar Verified icon
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    ..दिलके राज ..!                                                                                                             दिलके हसीन राज किसीको बताये कैसे ,                                                        छुपाना .भी चाहे अगर ...तो छुपाये ..कैसे ?

    दिया की कलम से इश्किया
    by Diyamodh
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    तुझे भूलाकर अब...तेरी यादों से  निकलकर अब, में  खुदमे खोना चाहती हूं   तुझे भूलाकर अब ,में  खुद को पाना चाहती हूं।    चल जब   गिनवा  ही  दी  है  तूने   मुझ ...

    माँ: एक गाथा - भाग - 2
    by Ajay Amitabh Suman
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    ये माँ पे लिखा गया काव्य का दूसरा भाग है . पहले भाग में माँ की आत्मा का वर्णन स्वर्ग लोक के ईह लोक तक , फिर गर्भधारण , ...

    दिलकी बाते - १
    by Vrishali Gotkhindikar Verified icon
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    जलवे ..      जुल्फ है या कोई घना कोहरा .. घटाए शायद दे रही है पेहेरा .. आखोमे छुपे है “मंजर”कई.सारे मस्तीके दिखते है हसीन नजारे . चेहेरेकी “रौनकका ...

    माँ:एक गाथा - भाग - 1
    by Ajay Amitabh Suman
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    ये कविता संसार की सारी माताओं की चरणों में कवि की सादर भेंट है.  इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक तक विभिन्न चरणों में ...

    भोजपुरी माटी
    by Radheshyam Kesari
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    आइल गरमी ------------- सूरज खड़ा कपारे आइल, गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले, बबूर खड़े सीवान। टहनी,टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई, ...

    अल्हड़
    by Mukteshwar Prasad Singh
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    तेज छिटकती बिजलीबादलों की गडगडाहटहवा के झूले पर डोलतीवारिस की बूंदें आ बैठती हैचेहरे पर।जलकणों से भीगता रोम रोम और सांसेंउतावली।बार बार तेज चमक से चौंकचुंधियाती आंखें मूंद जाती ...

    शायराना कलाम
    by Dr Gayathri Rao
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    शायराना कलम - कुछ भावनाये,कुछ एहसास,...मेरी शायरी के कुछ नगीने जो आप सबको पेश करती हु.

    ज्यादा बदलाव चाहोगे तो पीट दिये जाओगे (जुलाई २०१९)
    by महेश रौतेला
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    जुलाई २०१९१.ज्यादा बदलाव चाहोगे तोपीट दिये जाओगे,अधिक परिवर्तन चाहोगे तोमार दिये जाओगे,बहुत सुधार चाहोगे तोजेल भेज दिये जाओगे!मांगने पर कौरवों नेपाँच गांव भी नहीं दिये थे,और तुम जनता के ...

    थोड़े से तो थोड़े से, हम बदले तो है..!
    by Akshay Mulchandani
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    शायद, हम थोड़े से,  अब बड़े हो गए है..। उसके ऑनलाइन आने की राह, हम आज भी देखते है, जैसे कुछ साल पहले देखा करते थे..! पर थोड़ा सा ...

    व्यवधान
    by Ajay Amitabh Suman
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    एक फूल का मिट जाना हीं उपवन का अवसान नहीं,एक रोध का टिक जाना हीं विच्छेदित अवधान नहीं । जिन्हें चाह है इस जीवन में स्वर्णिम भोर उजाले की,उन ...

    तेरा घमंड
    by Manjeet Singh Gauhar
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    मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ...

    मैं तो बस इतना चाहूँ
    by Ajay Amitabh Suman
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    (१)    मैं तो बस इतना चाहूँ   हाँ मैं बस कहना  चाहूँ,हाँ मैं बस लिखना चाहूँ,जो नभ में थल में तारों में,जो सूरज चाँद सितारों में। सागर के अतुलित धारों ...

    गजल - वतन पर मिटने का अरमान
    by डॉ अनामिकासिन्हा
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                      " गरीब हूँ साहब"         **************************"भीगे हुए अरमान आज रोने को है|मत रोको गरीबी को, पेट के बल ...

    राख़
    by Ajay Amitabh Suman
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    (१)   ये कविता मैंने आदमी की फितरत के बारे में लिखा है . आदमी की फितरत ऐसी है कि इसकी वासना मृत्यु पर्यन्त भी बरकरार रहती है. ये ...