Hindi Novel Episodes Books and stories free PDF

    चिंटू - 14
    by V Dhruva Verified icon
    • (18)
    • 120

    कोचिंग सेंटर पहुंचकर चिंटू और रिया सारी फॉर्मेलिटी खत्म कर बाहर आते है। रिया चिंटू को कॉफी शॉप ले जाती है। वह चिंटू से कहती है- अभी क्लास शुरू ...

    चिंटू - 13
    by V Dhruva Verified icon
    • (15)
    • 180

    सुमति बेहोश हो गई थी और उसके तीनो चाहने वाले उसको होश में लाने की कोशिश कर रहे थे। रेस्टोरेंट के मैनेजर ने उन्हें सुमति को एक सोफे पर ...

    बड़ी बाई साब - 3
    by vandana A dubey
    • (12)
    • 141

     ऐसे अद्भुत व्यक्तित्व के धनी बहुत कम होते हैं, सो उनके जोड़ की बहू कैसे मिलती? सब उनसे उन्नीस ही थे. बीस कोई मिला ही नहीं, या उन्होंने खोजी ...

    चिंटू - 12
    by V Dhruva Verified icon
    • (17)
    • 153

    रिया को मिलने का टाइम साढ़े पांच बजे का था तो चिंटू ने सोचा के मै सुमति से मिलने साढ़े चार बजे पहुंच जाता हुं, मनाने में थोड़ा वक्त ...

    बड़ी बाई साब - 2
    by vandana A dubey
    • (18)
    • 224

    नीलू कब मुस्कुराने लगी, कब करवट लेने लगी, कब पलटने लगी, गौरी को पता ही नहीं. उसकी सहेलियां पूछतीं-”बिटिया अब तो पलटने लगी होगी न गौरी? खूब ध्यान रखना ...

    चिंटू - 11
    by V Dhruva Verified icon
    • (25)
    • 541

    अगले दिन पूरा दिन सुमति काम में व्यस्त रही। आज बॉस ने सबको जल्दी छुट्टी दे दी थी। सब के साथ स्नेहा और राहुल भी सुमति को लेकर जल्दी ...

    बड़ी बाई साब - 1
    by vandana A dubey
    • (19)
    • 292

    “ ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते !!.......नीचे मंडप में पंडित जी कलश स्थापना कर रहे थे. खिड़की से सिर टेके खड़ी गौरी चुपचाप सारे ...

    दोस्त की संघर्ष भरी जिंदगी... - 1
    by NR Omprakash Athak
    • (2)
    • 136

    दोस्त की संघर्ष भरी जिंदगी। (1)रघुनाथ नहा धोकर अपनी स्त्री को आवाज लगता हुआ बोला - अरे सुनो देवी मैं जरा बाहर उध्यान तक टहलकर आता हूँ ।इन्दिरा अपना बेग ...

    सिर्फ जिस्म नहीं मैं - भाग -1
    by Divya Sharma
    • (17)
    • 400

    मैं सिर्फ एक जिस्म नहीं..शॉवर के नीचे खड़ी हो अपने शरीर को तेज हाथों से रगड़ने लगी।हाथों का दबाव लगातार बढता जा रहा था और आँखों से निकलता सैलाब ...

    घरोंदा और अन्य कहानिया - बुढ़िया
    by Prashant Vyawhare
    • (5)
    • 155

    ! बुढ़िया ! सड़क के किनारे कचरे के ढेर में एक बूढ़ी औरत कचरा चुनने का प्रयास कर रही थी ! मैले कपडे, चिपके और कचरे से सने सफ़ेद ...

    चिंटू - 10
    by V Dhruva Verified icon
    • (18)
    • 363

    सुमति जब सौम्या बनकर खुश थी वहां चिंटू की परेशानियां बढ़ रही थी। सुमति के जाने के बाद उसे पता चला उसने क्या खोया है। सुमति ने अपना नंबर ...

    चिंटू - 9
    by V Dhruva Verified icon
    • (13)
    • 208

    सुमति कुछ देर बाद किसी से बात करके वापस आती है। वह अब नॉर्मल दिख रही थी। काफी समय हो गया तो राजदीप और सुमति घर जाने के लिए ...

    चिंटू - 8
    by V Dhruva Verified icon
    • (19)
    • 238

    डीएसपी वर्मा सर का घर बांद्रा में था। वह एक बारह मंजिला टॉवर में दसवीं मंजिल पे रहते थे। वैसे पार्टी टॉवर के सेक्रेटरी की परमीशन लेकर टैरेस पर ...

    घरोंदा और अन्य कहानिया - स्टंट मैंन
    by Prashant Vyawhare
    • (1)
    • 112

    ! स्टंट मैंन !   भररर…. आवाज के साथ आज तौफीक ने उसके मोटर साइकिल दौड़ाई, रास्ते पर चल रहे उस्मान चाचा को उसका धक्का लगते लगते बचा ! ...

    अच्छाईयां - ३७ - अंतिम भाग
    by Dr Vishnu Prajapati Verified icon
    • (6)
    • 158

    भाग – ३७ अंतिम भाग   ‘फिर क्या हुआ गुड्डी का...?’ सूरजने पूछा | ‘वो बारबार भागने की कोशिश कर रही थी, उसके बाप तेजधार को डराना चाहते थे ...

    चिंटू - 7
    by V Dhruva Verified icon
    • (15)
    • 295

    राजदीप सुमति को एक रेस्टोरेंट के पास ले आता है। सुमति यह देख उसे कहती है- ये तो बहुत महंगा रेस्टोरेंट है। हम यहां नहीं खाएंगे। राजदीप- महंगा नहीं ...

    घरोंदा और अन्य कहानिया - भाड़ा
    by Prashant Vyawhare
    • (4)
    • 174

    ! भाड़ा ! मुंबई शहर सबसे बड़ी समस्या घर की है ! इतना बड़ा शहर है और इस वजह कुछ लोग उसमे भी रास्ते निकल लेते है ! आज ...

    चिंटू - 6
    by V Dhruva Verified icon
    • (14)
    • 197

    चिंटू रिया के रंग में रंग गया था। सुमति अपने क्लास में आती जाती रहती है। चिंटू को भूलने के लिए वह ज्यादा टाइम वहा रुकती है। तभी एंट्री ...

    अच्छाईयां – ३६
    by Dr Vishnu Prajapati Verified icon
    • (6)
    • 84

    भाग – ३६ कोलेजमें पुलिस आते देखकर सरगमने जल्दी से दादाजी और झिलमिल को कुछ कहा और वो चिठ्ठी लेकर पीछे के दरवाजे से निकल गई | वो पहले ...

    अब लौट चले - 2
    by Deepak Bundela Moulik
    • (8)
    • 150

    मेरी तो किस्मत ही ऐसी है पिछली शादी की साल गिरह भी ऐसी ही निकल गई... जानू तुम अपना दिल छोटा मत करो... अभिषेक को मै सम्हाल लूंगा आज तुम ...

    चिंटू - 5
    by V Dhruva Verified icon
    • (17)
    • 202

    जब चिंटू घर आता है तो दरवाजा थोड़ा खुला हुआ देखता है। चिंटू सोचता है इसने दरवाजा खुला छोड़ा है तो आज तो इसे डराता हुं। वह जैसे ही ...

    चिंटू - 4
    by V Dhruva Verified icon
    • (15)
    • 260

    रात को गर्मी की वजह से सब टेरेस पर सोने जाते है। पहले तो निंद अा गई सबको पर आधी रात बीतने पर सुमति की निंद खुल गई। उसको ...

    घरोंदा और अन्य कहानिया
    by Prashant Vyawhare
    • (4)
    • 137

    ! घरोंदा ! सुनीता आज बहुत खुश थी ! २ दिन पहले ही उसकी शादी हुइ थी और आज वो उसके पति के साथ मुंबई जाने वाली थी, उसका ...

    चिंटू - 3
    by V Dhruva Verified icon
    • (12)
    • 243

    दिन बहुत अच्छे चल रहे थे। एक दिन सुमति की मां और पिता रविवार के दिन अपने मालिक के घर गए थे। मालिक ने उन्हे घर का ध्यान रखने ...

    अच्छाईयां –३५
    by Dr Vishnu Prajapati Verified icon
    • (4)
    • 82

    भाग – ३५ सूरज के हाथमें श्रीधर की चिठ्ठी थी और वो उसे पढ़ रहा था, ‘वैसे तो मैं माफी के लायक भी नहीं फिर भी आप मुझे माफ़ ...

    चिंटू - 2
    by V Dhruva Verified icon
    • (12)
    • 378

    सुमति ने चिंटू से पूछा- क्या हुआ चिंटू? तुम्हारा मुड़ कुछ ठीक नहीं लग रहा। चिंटू ने फिर जो आज स्कूल में हुआ वह सब बताया। सुमति- देख चिंटू, ...

    चिंटू - 1
    by V Dhruva Verified icon
    • (17)
    • 343

                मां मुझे भूख लगी है, हमे खाना कब मिलेगा? उसकी मां उसे अपनी गोद में बिठाकर कहती है जल्दी ही। पर ये तो ...

    अच्छाईयाँ - ३४
    by Dr Vishnu Prajapati Verified icon
    • (5)
    • 103

    भाग – ३४ दुसरे दिन सूरज और निहाल कोलेज के लिए निकले रास्ते में निहाल कई सारे सवाल करने लगा, ‘सूरज तु रात को कहाँ था ? वो इन्स्पेक्टर ...

    क्या यही प्यार है - 3
    by Deepak Bundela Moulik
    • (5)
    • 127

    भाग 3 "क्या यही प्यार हैं "रात के बारह बज चुके थे.... मेरी दास्तां सुनकर  हबलदार की हालत सुमेर की हालत पतली दिखाई एक बाबरी का मसला कम था जो ...

    बिन तेरे...! भाग 4 - लास्ट पार्ट
    by Dipti Methe Verified icon
    • (29)
    • 226

    Continue.........."राजीव..! कहाँ थे तुम..? तुम्हें पता भी हैं कितनी परेशान थी मैं तुम्हारे लिए | कमसे कम एक कॉल तो कर देते | और तुम फोन क्यूँ नहीं उठा ...