Human Science Books in Hindi language read and download PDF for free

    भारतीय गोरैया पक्षी
    by Sadanand Paul
    • 398

     भारतीय गोरैया पक्षी (Indian Sparrow Birds) : डॉ. सदानंद पॉल हे फुतकी गोरैया ! गोरैया पक्षी (Sparrow Birds) की एक युगल जोड़ी सप्ताह में एक दिन कहीं से उड़ ...

    हरामी
    by Kumar Gourav
    • 303

    हरामीसर्दी के मौसम में बस यात्रा में बदन सिकोड़े चुपचाप लघुशंका दबाए बैठा था । ड्राइवर ने ठेके पर दारू के लिए बस रोकी और मैं जल्दी से शंका ...

    प्रवाह - छुआइन
    by Yasho Vardhan Ojha
    • 281

                                     -:छुआइन:-"एगो रहे बुढ़िया, एगो ओकर बेटा अउर बेटा के मेहरारू। गांव के बहिरे ...

    सोशल मीडिया प्रदूषण (सोशल साइटों से प्रभावित मानव जीवन)
    by RAM NIVAS VERMA
    • 284

    S.M. POLLUTION राइटर - राम निवास वर्मा विषय - सोशल मीडिया विचार, हिंदी आर्टिकल वातावरण में अचानक परिवर्तन होने से मनुष्य और जीव – जंतुओं का जीवन बहुत प्रभावित ...

    लाश
    by Devendra Prasad
    • 332

    इस संसार में अगर को सत्य बात है तो वह है मृत्यु / एक न एक दिन सभी की मृत्यु आनी ही है चाहे कोई पशु हो पक्षी हो ...

    अश्लीलता
    by Rajesh Kumar
    • 664

     सामाजिक तौर पर अश्लील शब्द नकारात्मकता का सूचक है  अश्लील शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जिस का चरित्र काम वृत्ति प्रधान हो वह भी सामाजिक माहौल ...

    हाँ... नपुंसक हूँ मैं
    by राजीव तनेजा
    • 472

    “हाँ...नपुंसक हूँ मैं”बचाओ...बचाओ...की आवाज़ सुन अचानक मैं नींद से हड़बड़ा कर उठ बैठा। देखा तो आस-पास कहीं कोई नहीं था। माथे पर उभर आई पसीने की बूँदें चुहचुहा कर ...

    मानो न मानो
    by Shobhana Shyam
    • 535

    हम पढ़े लिखे लोग हर चीज को विज्ञान और तर्क के तराजू  पर तोले बिना किसी बात पर  विश्वास नहीं करते | यही हाल सुगंधा का था , वह ...

    मरना भी एक कला है
    by Satish Sardana Kumar
    • 460

     मरना भी एक कला है।भग्गू मरा तो पता चला।जैसे वह खामख्वाह जी रहा था वैसे ही एक दिन खामख्वाह मर गया।वरना मैंने इस तरह से आदमी मरते देखें हैं ...

    क्यूं मुश्किल में जान फसाये है
    by Ajay Kumar Awasthi
    • 406

         चमगादड़ एक ऐसा जीव है,जो रात के अंधेरे में उड़ता है,और जब सब जानवर सो रहे होते हैं, वो चुपके से उनके किसी नाजुक जगह को अपनी ...

    नाकामयाब शादियों के बढ़ते मामले चिंतनीय
    by Dr Monika Sharma
    • 396

    नाकामयाब शादियों के बढ़ते मामले चिंतनीय कुछ समय पहले आई संयुक्त राष्ट्र की "प्रोग्रेस ऑफ द वर्ल्ड्स विमेन 2019-2020 ­ फेमिलीज इन ए चेंजिंग वर्ल्ड" रिपोर्ट के मुताबिक हमारे ...

    चरित्र का चरित्रचित्रण
    by S Sinha
    • 521

                                       आलेख - चरित्र का चरित्रचित्रण    किसी भी शब्दकोष में चरित्र के अनेकों अर्थ मिलेंगे -   विशेषता , स्वरूप , अक्षर , पात्र , कीर्ति , ख्याति ,लक्षण, ...

    एक पाती दामाद के नाम
    by Dr. Vandana Gupta
    • 651

                                       प्रिय क्षितिज,          असीम स्नेहाशीष         तुम अवश्य ...

    बिटिया के नाम पाती... - 2
    by Dr. Vandana Gupta
    • 480

    प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार      तुमने कहा था कि मेरा पहला पत्र तुम्हें बहुत अच्छा लगा और यह भी कि फोन पर चाहे कितनी भी देर बातें कर ...

    सुंदरता क्या है
    by S Sinha
    • 470

                                                              ...

    बिटिया के नाम पाती... - 1
    by Dr. Vandana Gupta
    • 612

    प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार        मेरा पत्र पाकर तुम आश्चर्यचकित होंगी कि अभी तो मिलकर गयीं हैं मम्मा और रोज तो मोबाइल पर बात होती है, फिर ...

    दुष्कर्म के लिए बदला या इंसाफ
    by Ajay Kumar Awasthi
    • 712

         मारियो फुजो का सुप्रसिद्ध उपन्यास गाडफादर पर हालीवुड में सन 72 में गाडफादर के नाम से फिल्म बनी, जो सुपर डुपर हिट हुई . इस फिल्म के बाद ...

    सास भी कभी बहू थी
    by Dr. Vandana Gupta
    • (14)
    • 6.3k

           आज सरू जितनी खुश है उतनी ही उदास भी... जितनी उत्साहित है उतनी ही हताश भी... जितनी अतीत में गोते लगा रही है उतनी ही भविष्य ...

    लो फिर से चांडाल आ गया
    by Ajay Amitabh Suman
    • 666

    (१)  ये एक नकारात्मक व्यक्ति के बारे में एक नकारात्मक कविता है। चाहे ऑफिस हो या घर , हर जगह नकारात्मक प्रवृति के लोग मिल जाते है जो अपनी ...

    वैज्ञानिक साहित्य
    by Shailendra Chauhan
    • 617

    शैलेन्द्र चौहान यथार्थ का चित्रण, वैज्ञानिक साहित्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष है और उसका वैचारिक प्रतिफलन हमें रिपोर्ताज, डायरी, लेख, राजनीतिक आलेख इत्यादि में देखने को मिलता है। हिन्दी ...

    क्या है मतलब का मतलब?
    by Ajay Amitabh Suman
    • 818

    अजीब विरोधाभास है शब्दों में। अजीब द्वंद्व है शब्द भरोसे में, विश्वास में, आस्था में, घृणा में, प्रेम में। दरअसल शब्दों का कार्य है एक खास तरह के विचार को ...

    गलतफहमी
    by Dr. Vandana Gupta
    • 788

            सर्दी की दोपहर सिया को हमेशा ही अनोखे अहसास कराती है, पहले सिर्फ गुदगुदाती थी, अब कभी कभी उदास कर देती है। आज सुबह से ...

    गूंगा, बहरा, अंधा
    by Manjeet Singh Gauhar
    • 1.1k

    ये कहानी हमारे राष्ट्रीय पिता श्री महात्मा गॉंधी जी की और उनके तीन बन्दरों से मिली शिक्षा की है। वे बन्दर जिनका जैसचर(बॉडी स्टाइल) हमें बहुत अच्छा ज्ञान सिखा-कर ...

    अफवाह, भय और आक्रामकता
    by Ajay Kumar Awasthi
    • 564

    *अफ़वाह,भय और आक्रामकता*   इन दिनों मॉब लिचिंग की चर्चा है भीड़ द्वारा हिंसा । यह बहुत भयावह है कि किसी अजनबी पर सन्देह हो जाय और उसे भीड़ के ...

    इतने बूढ़े भी नहीं कि न समझे
    by r k lal
    • (26)
    • 795

    इतने बूढ़े भी नहीं कि न समझे                                    आर 0 के 0 लाल   एक बेटे ने अपने पिता को निर्देश दिया कि उसके कुछ दोस्त आज उससे मिलने ...

    प्रकृति के प्रति मानवी संघर्ष
    by ALOK SHARMA
    • 705

    पृथ्वी पर समस्त जीवों मे मानव प्राणी सबसे ज्ञानी और उत्तम प्रकृति का है तथा मनुष्य मानव सभ्यता के शुरूआत से ही अपने जीवन जीने से संबंधित साधनो को ...

    सपने और ख़्वाब
    by Manjeet Singh Gauhar
    • 463

    ' सपने 'इस संसार में ना जाने कितने एेसे काम हैं, जो आज तक शायद किसी भी व्यक्ति नही किए होगें।जैसे एक काम ये भी है कि कोई भी ...

    टूटते सामाजिक रिश्ते
    by Rajesh Kumar
    • 1.1k

    अगर इस सृष्टि की सबसे सुंदर रचना है तो वो है मनुष्य!मनुष्य का विवेकी होना, तथा आत्मज्ञान की ओर बढ़ना  ये कुछ गुण मनुष्य को बाकी जीवों से अलग ...

    वो बेकसूर..
    by Satyendra prajapati
    • (13)
    • 706

    ये खुदा तेरे बनाए इंसान से, अब इंसानियत बहुत दूर है।अब इन्हें इंसानियत पर नहीं, हैवानियत पर गुरूर है।बचे हैं जो कुछ इंसा यहां, क्या उनका इंसान होना कुसूर ...

    सिक्षा - Update education system
    by Sachin Ahir
    • (17)
    • 897

    बात ये ऐसी है थोड़ी गहराई से समझना,पहले परिस्थतिया जुदी थी अब जुदी है।थोड़ा नजरिया तो बदलो की,आज  जो रट रहे हो वो कल की रदी है ।।पुराने फूलों ...