Banjh by Mirza Hafiz Baig in Hindi Classic Stories PDF

बाँझ

by Mirza Hafiz Baig Matrubharti Verified in Hindi Classic Stories

बांझ1.शाम. . .खिड़की से बाहर देखते हुए, अपनी आत्मा के दर्द को महसूस करना जैसे उसके जीवन का ढर्रा बन गया था। शाम, रात में बदलने लगी थी। उसने एक गहरी सांस के साथ महसूस किया कि उसकी जिंदगी ...Read More