दिया की कलम से इश्किया

by Diyamodh Matrubharti Verified in Hindi Poems

तुझे भूलाकर अब...तेरी यादों से निकलकर अब, में खुदमे खोना चाहती हूं तुझे भूलाकर अब ,में खुद को पाना चाहती हूं। चल जब गिनवा ही दी है तूने मुझ को कमिया मेरी तो बिछड़कर तुझसे अब, में उन्ही कमियों ...Read More