prem ke panare by प्रिन्शु लोकेश तिवारी in Hindi Book Reviews PDF

प्रेम के पनारे

by प्रिन्शु लोकेश तिवारी in Hindi Book Reviews

*______क्रंदन______*~~~~~~~~~~~~~चोटों में दर्द प्रणय का है,पर जख्म अभी भी भारी है।ओठों में आश मिलन की है,पलको मे क्रंदन जारी है।।चित्राक्ष कहा यूं जाती हो,छोड़ के मेरी बस्ती को।चित्रांग कही हर न ले ये,तेरी इस भूली हस्ती को।।यादों में तेरे ...Read More