Hindi Poem status by Alpa on 29-Aug-2019 08:45am

कर्म की गति न्यारी है,, |
सारे जग पे भारी है,,|
यहाँ नहीं चलती लांच, रिष्वत,
ना चलती भ्रस्टाचारी है,,|
न कोइ अहंका

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