Hindi Poem status by Chirag on 15-May-2019 02:04pm

#kavyotsav2



‘ बचपन खो रही थी ‘



जा रहा था घर, शाम बाह़े खोल रही थी,

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Chirag 1 year ago

Great one ...thanks

Rj Krish 1 year ago

आँखें सबकी है खुली फिर भी जनता सो गई जिंदा है इंसान पर इंसानियत सबकी सो गई अल्हड़ सपनों में खोई एक नन्ही चिड़िया सो गई फुटपाथ की खुली राहों में देखो एक नन्ही बिटिया खो गई

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