મારા વિશે શું કહું..કોઇ બિજી વ્યક્તિ માટે બોલવું કે લખવું અમુક અંશે સરળ હોયછે. પણ જયારે પોતાના જ વિશે લખવાની વાત આવે ત્યારે ખબર ન પડે કે શું લખવું ... પણ મારી ર્વાતાઓ વાચકો સુધી પહોચાડી શકું અને મારી એક અલગ જ છાપ વાચકો ના મન પર રહે.એવી ઇચ્છા ....બિંદિયા..

એક વિરામ જયાં લીધો મેં એ પૂર્ણવિરામ સમજી બેઠાં છે,
મારાં પોતાનાં જ મને શું શું સમજી બેઠાં છે,
કયાં કયાં લડુ ચોતરફ શિકારી માંચડે બેઠાં છે
જયાં નજર ઉંચી કરીને જોઉં,
મારા જ મારી સાથે અદાવત કરી બેઠાં છે.

@B

Read More

मंज़िल से अब मुझे ख़ोफ सा रहता है,
ये रास्ते इतने खूबसूरत है तुम्हारे साथ ।

Bindiya
@the_thought_i_thought

क्यूं नहीं सोचता कोई, आखिर एक इंसान हूँ मैं ,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान हूँ मैं?

बस कहने को उजालों में जीता हूँ मैं,
अंदर से घुटा और परेशान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान
हूँ मैं?

निकलो तुम खुलेआम, अधनंगे बदन की नुमाईशों में
पर जो देख लूं एक नज़र तुम्हे , तो बस एक शैतान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

समाज ने तुम्हे सीता, मुझे शैतान दिखाया है,
रामायण में भी शूपर्णखा और मंथरा थी वो कभी याद नही आया है?
क्या सही में जो हो रहा उसका अकेला कुसूरवार हूँ मैं?
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

बराबरी की हो बात , क्यूं नही होता मुकाबला?
भगवान ने हम दोनों को एक सा ही बनाया है ,
फिर भी हर जगह तुमने लेडिज़ फर्स्ट का नियम लगाया है,
हर पुरुष को राक्षस ,औरत को सती नही मानता हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

Bindiya
@the_ thought_i_thought

Read More

क्यूं नहीं सोचता कोई, आखिर एक इंसान हूँ मैं ,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान हूँ मैं?

बस कहने को उजालों में जीता हूँ मैं,
अंदर से घुटा और परेशान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान
हूँ मैं?

निकलो तुम खुलेआम, अधनंगे बदन की नुमाईशों में
पर जो देख लूं एक नज़र तुम्हे , तो बस एक शैतान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

समाज ने तुम्हे सीता, मुझे शैतान दिखाया है,
रामायण में भी शूपर्णखा और मंथरा थी वो कभी याद नही आया है?
क्या सही में जो हो रहा उसका अकेला कुसूरवार हूँ मैं?
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

बराबरी की हो बात , क्यूं नही होता मुकाबला?
भगवान ने हम दोनों को एक सा ही बनाया है ,
फिर भी हर जगह तुमने लेडिज़ फर्स्ट का नियम लगाया है,
हर पुरुष को राक्षस ,औरत को सती नही मानता हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

Bindiya
@the_ thought_i_thought

Read More

ये लंबे से रास्ते, ये सडकें, मोहताज नही होते किसी मंज़िलों के, हां ..बेशक गुज़रती है कई मंज़िलें इनसे होकर, यहां हम मंज़िलों के ग़ुलाम नही, हमपर हुक़ूकनही होता उनका, ढूँढना नही होता कुछ ,सबकुछ सरेआम लेकर आगे निकलते हैं, बस पसंद है मुजे, यही लंबीसी सडकें, ये रास्ते जो किसी मंज़िलों के मोहताज नहीं होते । @B

Read More

जो पहने हुए हो यूं ,
तुम मुस्कुराहटों का क़बा, ये खुशियोंकी नुमाईशे तेरी कुछ मसनूईसी है।

@ B

"હું" થી "તું" નું અંતર કાપતાં કષ્ટ કયાં થાય છે? "હું" થી "હું" નું અંતર કયાંક જ્વલ્લે જ ઓછું થાય છે, લોકો આવીને મને મારાથી રૂબરૂ કરી જાયછે,
આજકાલ મારી મારાથી જ રોજ નવી ઓળખાણ થાય છે. @B

Read More

દાયરાના દરિયામાં ક્યાં સુધી રાખીશ તું?
એ ખુલ્લા આકાશનું પંખી,
કયાં સુધી બાંધીને રાખીશ તું હેમખેમ, અંતે તો હાર તું ચાખીશ.
પિંજરાના દ્વાર આમ બંધ થોડી રહેશે, કોક'દિ અચાનક એ ખુલશે,
ત્યારે એ પંખી છટકયું જો હાથમાંથી,ઉંચે ગગન એ ઝુલશે.
વાડ નથી એવી જે રોકે પખેરુંને ,ઇચ્છા મુજબ એ વિહરસે.
@B

Read More