Hey, I am on Matrubharti! आप सब का स्नेह ही हमारी अमूल्य धरोहर है ।मेरी स्वरचित रचनाओं के पात्र ,समाज में कहीं भी हमारे आस-पास ही मिल सकते हैं।सामाजिक एवं बच्चों के लिए लिखने का प्रयास किया है ।मेरा उद्देश्य समाज के किसी व्यक्ति को दुख पहुँचाने का नहीं है।

“उसकी तहज़ीब थी कि वह
झुक कर मुझसे मिला था,
वरना वह शख़्स कद में
मुझसे बहुत बड़ा था ।”
आशा सारस्वत

मातृ भारती टीम का हार्दिक आभार 🙏

रिश्तों में मिठास
यूँ ही नहीं आती
जनाब
गुलकंद के लिए
फूलों को मरना
पड़ता है…
आशा सारस्वत

गलती नीम की नहीं,
कि वह कड़वा है।
ख़ुदगर्ज़ी तो जीभ की है,
जिसे मीठा पसंद है ..
आशा सारस्वत

यदि हम सोचें कि हमारा
कोई विरोध न करे,
तभी हम कुछ कर सकेंगे;
तो यह कभी न होगा ।
हम विश्वास करें कि हम
सब बाधाओं पर विजयी
हो सकेंगे ।
‘उठें और आगे बढ़ें..’
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आशा सारस्वत

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“ज़िम्मेदारी के आगे
सपने हार जाते हैं..”
आशा सारस्वत

कुछ साथ वास्तव में
यक़ीन दिलाते हैं कि
प्यार कितना
ख़ूबसूरत है..
आशा सारस्वत