i love my self ... my family

बेशरम सी है ये हवा
तेरे आने से पहले
ये आंचल उड़ाती है
जिस्म को छू कर रूह से कहती है
अब बहुत दूर नहीं है तू

रोज़ सुबह ज़िन्दगी का एक नया पन्ना लिखती हूं
उम्मीदों की कलम से हसरतों की स्याह भरती हूं
प्रेम भरे शब्दों से जरुरतों का मिलान करती हूं
रोज़ एक नई पहचान के साथ ज़िन्दगी की किताब लिखती हूं ।

Arti shukla

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रह गए कुछ ख्वाब अधूरे
छूट गए जो कभी थे अपने
रातों का सन्नाटा था बस
और धुंधली धुंधली कुछ तस्वीरें

Arti shukla

मुझसे मेरी खामोशियों की वजह ना पूछ
तेरे अरमानों से होकर जो गुज़री हूं

जब भी कोई कहानी ख़तम होती है ना
तो रुके हुए कई सैलाब टूट जाते है

अभी रुकी हूं मैं ज़िन्दगी से कोई जल्दी नहीं
थोड़ा लफ़्ज़ों को बदल दूं थोड़ा सा मैं भी भटक लूं
आशियाने को सजा लूं दुबारा फिर आऊंगी
इतनी बैचैनी किस बात कीअभी तो आसमां हमारा है
तुम दूर तलक साथ चलना मेरे साया बनकर साथ रहना मेरे
अभी ना तुम ये मोती गिराना की निकला नहीं है अभी जनाजा हमारा

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आपकी नज़रों ने समझा
प्यार के काबिल मुझे
दिल की ए धड़कन संभाल जा
मिल गई मंज़िल मुझे .....

बहुत खूबसूरत गीत है ना ,पर क्या सच में इतना आसान होता है मंज़िल का मिल जाना , किसी की प्यार की नजर क्या ज़िन्दगी को आसान बना देती है ????
नहीं जानती मैं की क्या होता है अक्सर ,,,,,

प्यार खुद में एक सजा होती है या सजा ही प्यार होता है
पहेली है ना ये ,,,,पर इसमें हर कोई उलझना चाहता है
ये जो दिल है ना बड़ा बेपरवाह बड़ा सितमगर होता है
अपने सिवा किसी की सुनता ही कहां है ,,
और हम इस दिल के सिवा किसी की सुनते भी कहां है ।

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मुझमें कोई ऐब नहीं
बस तेरे इश्क़ के सिवा
कोई मन्नत नहीं

वो इश्क़ का कोई वजूद नहीं
जिसे तेरे लरजते होठों का नशा नहीं ।

Arti shukla

मेरे आंसूओं का कोई मोल नहीं
जो तेरी सदाओं से टकराती नहीं

Arti shukla