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દુઃખ તો દરિયા જેવું છે,
તે પહેલાં અંદર ડૂબાડે છે,
અને પછી મૂલ્યવાન મોતી આપે છે.

मैं मौंन हूँ,कुछ भी शब्द नही लिख पा रह़ा हूँ,,
उस नन्ही मासूम नाजुक कली पर क्या बीती होगी,जब उसके कोमल नाजुक अंगो को नोचा जा रहा होगा?
क्या उस दानव को जरा भी रहम नही आया होगा,उस मासूम की कानो और आँखो दोनो से खून निकाल देने वाली दर्द से भी ज्यादा दर्दनाको चींखो से?
एक औरत को प्रसव पीड़ा में जितना भंयकर दर्द होता है..
उससे कहीं लाख गुना अधिक पीड़ा झेल रही होगी वो नाजुक मासूम बच्ची ,जब उसके कोमल अंग मे एक सख्त लोहे की रोड़ समान लिंग ने उसे चीरा होगा?
सोच सोच कर ही अंदर तक रूह काँप उठती हैं,क्या बीती होगी उस बच्ची पर...
नही लिख पा रहा हूँ,,कलम चल ही नहीं रही ..?
उस दैत्य दानव का इससे भी मन नही भरा,,उसके कोमल अंगो को काट डाला,,आँखे नोच डाली?
ऐसे दानव के लिए मृत्यु दंड बहुत कम सज़ा है..
संविधान मे आज के लिए बदलाव करके,उसे पब्लिक के हाथो सौंप देना चाहिए,, अरे कानून से बढ़कर शाशक के लिए होता है अपनी प्रजा की रक्षा करना..
अगर ये छूट गया,, तो कल को और टविंकल को तैयार रखना ऐसे दानवो के लिए?
समय की माँग है कानून मे बदलाव हो..
कानून प्रजा के लिए है,ना कि प्रजा कानून के लिए बनी है..
समय समय पर हर चीज मे परिस्थितियों को देखकर बदवाल किया जाता है...
अब बेहद सख्त जरूरत है...
अरे उस बच्ची के माँ बाप से पूँछो ,,उन का क्या हाल होगा,,अगर उन्हें न्याय नही मिला..
वो जीवनभर इसे सदमे से बाहर नही आ पायेंगे
ये लचर कानून व्यवस्था ही जो दिन पर दिन ऐसे वीभत्सता भरे अपराध होते जा रहे हैं।
टविंकल तुम जहाँ भी बेटा,,जो तुमने वो भयावहता भरा दर्द झेला,,हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते??
मगर बच्चे ,,तुम्हें न्याय जरूर मिलेगा ,,यही उम्मीद है हर किसी को..
बस आँखे छलक पड़ी है विराम देता हूँ शब्दों को....??

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सांसे खर्च हो रहीं है, बीती उम्र का हिसाब नहीं फिर भी जीए जा रहें हैं, तुझे ए जिंदगी तेरा जवाब नहीं...!!

तेरे मकान तक पंहुच कर भी.. दस्तक ना दे सका... ख्वाहिशें उसूलों की चौखट पर दम तोड़ गईं ..

हजारो ख्वाइश एसी के हर ख्वाइश पे दम निकले।

गुस्से का अंतिम रुप मौन होता है।

हम सिगंल लोग है, साहब वेलेंटाइन डे को YouTube Ad की तरह sikp कर देंगे. . ?

आपका कर्म हीं आपकी पहचान है, वर्ना एक हीं नाम से हज़ारों इंसान है...!!