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टापुओं पर पिकनिक.

by Prabodh Kumar Govil
  • 118.3k

आर्यन तेरा वर्षांचा झाला. काल त्याचा वाढदिवस होता. तो या वाढदिवसाची कितीतरी दिवसांपासून वाट पाहत होता. तो खूप उत्सुक ...

మధురానగరిలో మురళీ గానం భాగం

by Radhika Lakshmi
  • 66.3k

యంత్రం ఐదు గంటలు................వాతావరణం చాలా చల్లగా ఆహ్లాదకరంగా ఉంది.... రోడ్డు మీద వెళ్తున్న వెహికల్స్నడుచుకుంటూ ఇళ్ళకు చేరుతున్న జనం, అలసిపోయి ఆ చల్లటి గాలికి సేద తీరుతూరేపటి పని ...

अनुबंध बंधनाचे..

by prem
  • (4.2/5)
  • 527k

नमस्कार माझ्या प्रिय वाचक मित्र आणि मैत्रिणींनो...?? माझे नाव मेघना उर्फ मेघा.... आज मी तुम्हा सर्वांसाठी एक खुप छान अशी ...

यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

by Ramesh Desai
  • 137.3k

उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी ...

माई डियर प्रोफेसर

by Vartikareena
  • 39.9k

बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये ...

जिंदगी की दूसरे किनारा

by AbhiNisha
  • 8.4k

जिंदगी के पार जिंदगी कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है एक पजल की तरह जिंदगी की ...

মহাভারতের কাহিনি

by Ashoke Ghosh
  • 764.8k

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-১ প্রাককথন সেইসব মানুষের সংখ্যা অত্যন্ত নগণ্য, যাঁরা বিশালাকার মহাগ্রন্থ মহাভারত সম্পূর্ণ পাঠ করেছেন। ...

चलो दूर कहीं..!

by Arun Gupta
  • 18.7k

मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य ...

वरदान

by Renu Chaurasiya
  • 33k

एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ ...

तेरे मेरे दरमियान

by CHIRANJIT TEWARY
  • (4.1/5)
  • 391.7k

शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की ...

दुश्मनी के दरमियान इश्क

by Shivraj Bhokare
  • 3.7k

वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर ...

The Girl Who Came Unwillingly

by Kavya Pattar
  • (4.5/5)
  • 125.3k

Hello everyone, This story is entirely fictional. It has no connection with any real person, place, or incident. Since this ...

રૉય - ધ પ્રિન્સ ઓફ હિઝ ઑવ્ન ફૅટ

by મૃગતૃષ્ણા mrigtrushna"
  • 83.9k

આ રચના સંપૂર્ણપણે કાલ્પનિક છે જેનો જીવિત કે મૃત તથા કોઈપણ ઘટના, ધર્મ, પ્રદેશ સાથે સંબંધ નથી. જો કોઈ ...

நிழல் தரும் வசந்தம்

by kattupaya s
  • 19.7k

அந்த நாளை எப்படி துவங்குவது என்பது பிரேமுக்கு தெரியவில்லை. எப்போதும் போல இருந்து விட முடியவில்லை. வேலையில்லா நாட்கள் பெரும் சுமையாய் இருந்தன. படிப்பு முடிந்து ...

ರಕ್ತ ಲಿಪಿಯ ಚಿರಂಜೀವಿ

by Saandeep Joshi
  • 19.3k

ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी

by Jyoti Prajapati
  • 73k

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की ...

सौदों में बंदी जिंदगी

by kajal jha
  • (4.6/5)
  • 83.1k

मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ ...

बिल्ली जो इंसान बनती थी

by Sonam Brijwasi
  • 48.1k

Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी ...

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई

by Ramesh Desai
  • 53.5k

15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही ...

Trikon - एक्शन सीरीज़

by Varun Vilom
  • 24.6k

दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों ...