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तेरे मेरे दरमियान - 57

by CHIRANJIT TEWARY

कृतिका :- कैसे चितां ना करु । अंकल ( अशोक ) आप उसे कल अपने घर लेकर आईएगा । ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 36

by CHIRANJIT TEWARY
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कुंम्भन का नाम सुनकर सब घबरा जाता है। और डर से इधर उधर देखने लगता है।एकांश घबराते हुए कहता ...

तेरे मेरे दरमियान - 56

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 378

आदित्य :- अहां । मैं नही रोकुगां ।मोनिका :- तो फिर कौन रोकेगा ।आदित्य फिर हल्की मुस्कान देता है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 35

by CHIRANJIT TEWARY
  • (4.4/5)
  • 816

वर्शाली को देखकर एकांश कहता है-->" वर्शाली तुम यहां ?वर्शाली एकांश से कहती है---->" हाँ जी मैं यहां आपके ...

तेरे मेरे दरमियान - 55

by CHIRANJIT TEWARY
  • (4.9/5)
  • 864

मोनिका नेक्लेस दैखकर बहोत खुश हो जाती है और कहती है --मोनिका: - वाव , कितना सुंदर है , ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 34

by CHIRANJIT TEWARY
  • 648

एकांश मन ही मन सोचता है----->" अच्छा तो वो लाल शिला ही रक्षा कवच है।कुछ दैर में सभी उस ...

तेरे मेरे दरमियान - 54

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.1k

रागिनी की बात को सुनकर सभी हक्का बक्का रह जाता है ।रागिनी फिर कहती है --रागिनी :- मैं उस ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 33

by CHIRANJIT TEWARY
  • 984

दक्षराज कहता है--->" वो मार्ग मुझे बताइये बाबा।अघोरी कहता है--->" तेरे लिए दो रास्ते है दक्ष। एक जो मैंने ...

तेरे मेरे दरमियान - 53

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.1k

विद्युत रागिनी से कहता है --विद्युत :- Congratulation बेटा ।रागिनी :- थेंक्यू अंकल ।विद्युत :- प्रताप , तेरी बेटी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 32

by CHIRANJIT TEWARY
  • 690

चतुर कहता है--->" वो तो मेला में है क्योंकि हम दोनो ने उधर एकफास्टफूड का दुकान लगाया है। वो ...