आलोक मिश्रा "मनमौजी" व्यंग्य , कहानी लेखक किसी परंपराओं नहीं मानता इसलिए रचनाऐं पारंपरिक श्रेणी में नहीं आती । मेरी रचनाऐं सोचने हेतु मजबूर करती है अधूरी लगती है । सभी " अधूरे संवाद " के अंतर्गत आती है ।

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