Hindi Thought videos by Nitya Oswal Watch Free
Published On : 03-May-2026 09:36pm8 views
प्रश्नकर्ता: मनुष्य का ध्येय क्या होना चाहिए?
दादाश्री: मोक्ष में जाने का ही! यही ध्येय होना चाहिए। आपको भी मोक्ष में ही जाना है न? कब तक भटकना है? अनंत जन्मों से भटक भटक... भटकने में कुछ बाकी ही नहीं रखा है न! तिर्यंच (जानवर) गति में, मनुष्यगति में, देवगति में, सभी जगह भटकता ही रहा है। क्यों भटकना पड़ा? क्योंकि ‘मैं कौन हूँ,’ इतना ही नहीं जाना। खुद के स्वरूप को ही नहीं पहचाना। खुद के स्वरूप को जानना चाहिए। ‘खुद कौन है’ वह नहीं जानना चाहिए? इतना घूमे फिर भी नहीं जाना आपने? सिर्फ पैसे कमाने के पीछे पड़े हो? मोक्ष के लिए भी थोड़ा-बहुत करना चाहिए या नहीं करना चाहिए?
प्रश्नकर्ता: करना चाहिए।
दादाश्री: अर्थात स्वतंत्र होने की ज़रूरत है न? ऐसे परवश कब तक रहना है?
प्रश्नकर्ता: मैं ऐसा मानता हूँ कि स्वतंत्र होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन स्वतंत्र होने की समझ की ज़रूरत है।
दादाश्री: हाँ, उस समझ की ही ज़रूरत है। उस समझ को हम जान लें तो बहुत हो गया, भले ही स्वतंत्र नहीं हो पाएँ। स्वतंत्र हो पाएँ या न भी हो पाएँ, वह बाद की बात है। फिर भी उस समझ की ज़रूरत तो है न? पहले समझ प्राप्त हो गई, तो बहुत हो गया।
उपरोक्त संदर्भित माहिती: पुस्तक : मैं कौन हूँ? (पृष्ठ क्रमांक #२० परिच्छेद द्वितीय)
#DadaBhagwan #SelfRealization #AkramVignan #Shuddhatma #GnanVidhi #DadaBhagwanFoundation
https://youtu.be/Hu8LzlxHt0M?si=HBZOF7uNXUEYWTRn
दादाश्री: मोक्ष में जाने का ही! यही ध्येय होना चाहिए। आपको भी मोक्ष में ही जाना है न? कब तक भटकना है? अनंत जन्मों से भटक भटक... भटकने में कुछ बाकी ही नहीं रखा है न! तिर्यंच (जानवर) गति में, मनुष्यगति में, देवगति में, सभी जगह भटकता ही रहा है। क्यों भटकना पड़ा? क्योंकि ‘मैं कौन हूँ,’ इतना ही नहीं जाना। खुद के स्वरूप को ही नहीं पहचाना। खुद के स्वरूप को जानना चाहिए। ‘खुद कौन है’ वह नहीं जानना चाहिए? इतना घूमे फिर भी नहीं जाना आपने? सिर्फ पैसे कमाने के पीछे पड़े हो? मोक्ष के लिए भी थोड़ा-बहुत करना चाहिए या नहीं करना चाहिए?
प्रश्नकर्ता: करना चाहिए।
दादाश्री: अर्थात स्वतंत्र होने की ज़रूरत है न? ऐसे परवश कब तक रहना है?
प्रश्नकर्ता: मैं ऐसा मानता हूँ कि स्वतंत्र होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन स्वतंत्र होने की समझ की ज़रूरत है।
दादाश्री: हाँ, उस समझ की ही ज़रूरत है। उस समझ को हम जान लें तो बहुत हो गया, भले ही स्वतंत्र नहीं हो पाएँ। स्वतंत्र हो पाएँ या न भी हो पाएँ, वह बाद की बात है। फिर भी उस समझ की ज़रूरत तो है न? पहले समझ प्राप्त हो गई, तो बहुत हो गया।
उपरोक्त संदर्भित माहिती: पुस्तक : मैं कौन हूँ? (पृष्ठ क्रमांक #२० परिच्छेद द्वितीय)
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