Hindi Motivational videos by bhagwat singh naruka Watch Free

Published On : 19-Jan-2026 11:28pm

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बहुत सजाया-सँवारा करता था इस बदन को,
कपड़े, ख़ुशबू, आईना — सब अपना लगता था।
जब ये राख हुआ तो समझ आया,
कि जो अपना समझते थे,
वो सब यहीं रह गया।
ना साथ गया हुस्न, ना नाम की पहचान,
मिट्टी ने बस मिट्टी को अपनाया
और हर गुमान यहीं रह गया।
ज़िंदगी भर जिस देह को
सब कुछ समझते रहे,
अंत में वही देह
एक मुट्ठी राख बनकर
इस संसार में ही रह गया।
यही सच है —
हम नहीं रहते,
बस हमारे निशान
कुछ देर तक
यहीं रह जाते हैं।

writer bhagwatSinghnaruka

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