Hindi Poem videos by ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़ Watch Free

Published On : 04-Jan-2026 01:47pm

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🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 न┤_★__
बड़ी हसरत थी उन्हें, कांच का
          घर सजाने की,

अब टुकड़ों में ढूंढते हैं वजह
           मुस्कुराने की,
_
कहते  थे  कि  इश्क़ रूह का
        इबादत- खाना है,

मालूम न था,  ये तो खुद को
       मिटाने का बहाना है,
_
बड़ी रौनक थी उनके चेहरे पर
             कल तलक,

आज  वफ़ा  की बस्ती में वो
        कंगाली देख आए,
_
जो सिखाते थे ज़माने को जीने
           का सलीका,

सुना है, आज वो खुद अपनी
    मय्यत सजा आए....🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
 #LoVeAaShiQ_SinGh
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