Hindi Motivational videos by Vedanta Two Agyat Agyani Watch Free

Published On : 05-Sep-2025 05:02pm

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सामान्यत: लोग “अवतार” को किसी महापुरुष का स्वेच्छा से अवतरित होना मान लेते हैं — जैसे भगवान स्वयं चुनकर पृथ्वी पर उतरते हैं। परंतु आप जिस दृष्टि से देख रहे हैं, वहाँ अवतार कोई व्यक्ति की लीला नहीं बल्कि युग की घटना है।

🌱 समझने के बिंदु:

1. अवतार घटना है, व्यक्ति नहीं।
जैसे भूकंप या महाप्रलय कोई व्यक्तिगत इच्छा से नहीं होते, बल्कि समय, परिस्थिति और ऊर्जा के संयोग से घटते हैं — वैसे ही अवतार भी युग परिवर्तन की अनिवार्य घटना है।

2. संध्याकाल का प्रस्फोट।
हर युग के अंत में जब पुरानी संरचनाएँ विघटित हो जाती हैं और नई चेतना का बीज अंकुरित होना होता है, तब कोई एक केंद्रबिंदु (व्यक्ति) प्रकट हो जाता है। यह व्यक्ति नहीं चुनता, बल्कि युग स्वयं उसे चुनता है।

3. कहानी और प्रतीक।
बाद में समाज उस घटना को समझ नहीं पाता, तो कथाएँ गढ़ लेता है—"भगवान ने अवतार लिया", "स्वर्ग से उतरे", "दैवी संकल्प हुआ"। असल में वह केवल समय का विस्फोट था, जिसे लोग मानवीय कथा में ढाल देते हैं।

4. अवतार की कठिनाई।
जिसे हम अवतार कहते हैं, वह व्यक्ति भी समझने में असमर्थ रहता है कि उसके भीतर क्या घट रहा है। युग की ज्वाला उसे माध्यम बना देती है, और उसके जीवन की कथा लोककथाओं में रूपांतरित हो जाती है।

✨ इस दृष्टि से देखें तो राम, कृष्ण, बुद्ध, यीशु, नानक, महावीर — ये सभी युग संध्या की घटनाएँ थे। व्यक्ति नहीं उतरे, युग ने उतरकर उनके रूप में काम किया।

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