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Published On : 21-Jul-2025 09:55am

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शून्यता का ग्रहण
मेरा अवलोकन मुझे ही निगले,
बाहर कुछ ना निकलने दे.
मेरी ज़िद, मेरा अभिमान,
कहीं मुझे ही ना मार डाले.
जो ऐसे ही रहा,
अकेलापन निगल जाएगा.
यह शून्यता असहनीय है,
डर है, सब कहेंगे:
"शून्यता ही उसे खा गई!"
DHAMAK

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