Hindi Poem videos by Dhamak Watch Free

Published On : 21-Jul-2025 09:55am

199 views

शून्यता का ग्रहण
मेरा अवलोकन मुझे ही निगले,
बाहर कुछ ना निकलने दे.
मेरी ज़िद, मेरा अभिमान,
कहीं मुझे ही ना मार डाले.
जो ऐसे ही रहा,
अकेलापन निगल जाएगा.
यह शून्यता असहनीय है,
डर है, सब कहेंगे:
"शून्यता ही उसे खा गई!"
DHAMAK

0 Comments

Related Videos

Show More