Hindi Poem videos by Dhamak Watch Free

Published On : 26-Apr-2025 06:53pm

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जब मौका मिलता है तब,
खुद को जलाती हूँ।
कि मेरा अंधापन दुनिया का,
उजाला कम न कर दे।
इसलिए ही छोटे बच्चों को,
यह नई दुनिया दिखाती हूँ।
बात यह है कि मेरे पास,
आगे देखने के लिए कुछ नहीं है।
किसी कारण से खुद को प्रगति मिले,
इसलिए रोज़ कंधा झुकाती हूँ।

d h a m a k
the story book, ☘️📚

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