Yogita Warde, Blog on 05-Feb-2019 11:54pm | Matrubharti | Blog Video

Published On : 05-Feb-2019 11:54pm
खेलते-कूदते हुए वो सपने जो अभी बड़े नहीं हुए,
कोई गिरता हुआ, कोई संभलता हुआ,
अपनी अपनी कहानी को गढ़ता हुआ,
अपनी मस्ती में चूर..
ना कुछ खोने का ग़म ना पाने का,
फिर भी चेहरे पर ख़ुशी लिए,
गिरकर संभलना फिर चलना,
एक नयी कहानी लिए,
यही है बचपन, जो एक बार जीना है..

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